🌸कहते है कस्मो वादों के बिना जिंदगी बीतती नहीं है। पर इंसान की समझ पर है ये तो की कैसे जी रहा है। और अकेले तो बिना ढंग के ही जीता है। इसलिए माँ प्रकृति ने पुरुष को आधा ही रखा और सारी अहमियत दे दी स्त्री को। आपको पता है एक पुरुष बिना सन्यास के कितना भी कर्म करले उसे उसका आधा भाग ही मिलता है। बिना अर्धांगिनी के। पुरुष जिंदगी भर अधूरा ही रहता है और उसके किये हुए अच्छे कर्म भी।
इसलिए नारी का सम्मान करो अगर नारी ना होती तो कोई नहीं होता।
जब शिव शक्ति विवाह बंधन मे बंध रहे थे। तब विष्णु जी और अन्य देवताओं ने हाथ जोड़ कर महादेव जी से प्रार्थना की।
महादेव आप अब माँ शक्ति की वजह से पूर्ण होने जा रहे है। अब संसार उसी पथ का अनुसरण करेगा जो पथ आप दोनों बनाएंगे।
इसलिए हे महादेव माँ पार्वती ने कठोर तपस्या करके आपको प्राप्त कीया है और अब आप हमेशा के लिए एक दूसरे के साथ बंधन मे बंधने जाने वाले है। कृपया संसार को ऐसा मार्ग बताये जिस से वो भी जन्मों - जन्मों तक एक दूसरे के साथ रहे। तब विष्णु जी और देवताओं की वंदना सुन कर।
देवो के देव महादेव और हिमालय- मैना की पुत्री माँ पार्वती एक दूसरे
की तरफ देख कर मुस्कुराये और एक दूसरे को 7-7 वचन दिए ताकि मनुष्य विवाह से पहले यही वचन एक दूसरे को दे और निभाए भी।
क्योंकि सृष्टि पर विवाह की शुरुआत शिव-शक्ति के विवाह से हुई थी और वचन की शुरुआत भी इसलिए जो भी मनुष्य इन वचनों को अपने जीवन मे अपनाता है वो साक्षात् शिव - शक्ति स्वरूप है।
जीवन की खुशियों का गहरा राज छिपा है इन वचनों मे।
पहला वचन।
यदि आप कभी तीर्थ यात्रा पर जाओ तो मुझे साथ लेकर जाओगे।
कोई व्रत उपवास या धार्मिक कार्य करते समय मुझे भी साथ रखोगे यदि ये वचन देते हो तो मै आपके वाम अंग आना पसंद करूंगी।
तीर्थ - जो स्थान मन-प्राण-शरीर को निर्मल कर दे, वही तीर्थ है।
मन निर्मल विचारों से होता है, प्राण प्राणायाम से और शरीर पवित्रता से
व्रत उपवास जब करमेंद्रीय और ज्ञानेंद्रीय ध्यान मे बैठने पर शांत हो जाये या धार्मिक कार्य सच बोलना, माता पिता की सेवा करना ईश्वर भक्ति करना।
ऐसे सब काम मे पत्नी को साथ रखने का वचन दे और वचन निभाये भी तब वो आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करेगी।
ॐ नमः शिवाय🌌
इसलिए नारी का सम्मान करो अगर नारी ना होती तो कोई नहीं होता।
जब शिव शक्ति विवाह बंधन मे बंध रहे थे। तब विष्णु जी और अन्य देवताओं ने हाथ जोड़ कर महादेव जी से प्रार्थना की।
महादेव आप अब माँ शक्ति की वजह से पूर्ण होने जा रहे है। अब संसार उसी पथ का अनुसरण करेगा जो पथ आप दोनों बनाएंगे।
इसलिए हे महादेव माँ पार्वती ने कठोर तपस्या करके आपको प्राप्त कीया है और अब आप हमेशा के लिए एक दूसरे के साथ बंधन मे बंधने जाने वाले है। कृपया संसार को ऐसा मार्ग बताये जिस से वो भी जन्मों - जन्मों तक एक दूसरे के साथ रहे। तब विष्णु जी और देवताओं की वंदना सुन कर।
देवो के देव महादेव और हिमालय- मैना की पुत्री माँ पार्वती एक दूसरे
की तरफ देख कर मुस्कुराये और एक दूसरे को 7-7 वचन दिए ताकि मनुष्य विवाह से पहले यही वचन एक दूसरे को दे और निभाए भी।
क्योंकि सृष्टि पर विवाह की शुरुआत शिव-शक्ति के विवाह से हुई थी और वचन की शुरुआत भी इसलिए जो भी मनुष्य इन वचनों को अपने जीवन मे अपनाता है वो साक्षात् शिव - शक्ति स्वरूप है।
जीवन की खुशियों का गहरा राज छिपा है इन वचनों मे।
पहला वचन।
यदि आप कभी तीर्थ यात्रा पर जाओ तो मुझे साथ लेकर जाओगे।
कोई व्रत उपवास या धार्मिक कार्य करते समय मुझे भी साथ रखोगे यदि ये वचन देते हो तो मै आपके वाम अंग आना पसंद करूंगी।
तीर्थ - जो स्थान मन-प्राण-शरीर को निर्मल कर दे, वही तीर्थ है।
मन निर्मल विचारों से होता है, प्राण प्राणायाम से और शरीर पवित्रता से
व्रत उपवास जब करमेंद्रीय और ज्ञानेंद्रीय ध्यान मे बैठने पर शांत हो जाये या धार्मिक कार्य सच बोलना, माता पिता की सेवा करना ईश्वर भक्ति करना।
ऐसे सब काम मे पत्नी को साथ रखने का वचन दे और वचन निभाये भी तब वो आपकी अर्धांगिनी बनना स्वीकार करेगी।
ॐ नमः शिवाय🌌
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