🌸आप जिस तरह अपने माता पिता का सम्मान करते हैं उसी तरह मेरे माता पिता का भी हमेशा सम्मान करेंगे तथा परिवार की मर्यादा का निर्वाह करते हुए ईश्वर की भक्ति और धर्म अनुष्ठान करते रहेंगे यदि ये वचन देते हो तो मै आपके वामअंग(बाई तरफ) आना स्वीकार करती हूँ।
कितने सुंदर शब्द हैं एक कन्या कितना कुछ छोड़ कर आती हैं। वो कभी कुछ नहीं मांगती जीवन भर सिवाए इन वचनों के।
अब रिश्ते ना टिकने का कारण और दोष ज्यादातर लड़को को ही जाता हैं।
मेरी नज़र मे पूरा दोष ही लड़के का हैं अगर सही समझ से बस इन 7 वचन को निभाये तो खुशी ही खुशी हो परिवार मे।
पर खुद के माता पिता का सम्मान नी करते ढंग से। मेरे एक परिचित लड़के ने मुझे बताया की जीवन मे बोहोत परेशानी हैं तो मैंने उसे कहा की सुबह उठ कर माता पिता के चरण छुआ करो। वो बोला नहीं ये नहीं कर सकता मुझे शर्म आती हैं। मै बस मुस्कुरा कर रह गया और सोचा की कहाँ से निभा लेंगे ये रिश्ते नाते।
ज़रूरी नहीं की कन्या के विवाह के बाद सिर्फ लड़के के माता पिता उसके माँ बाप समान हुए। लड़की के माता पिता की अहमियत कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। अगर वो अपनी कन्या ही ना दे तो। वंश समाप्त लड़के का।
परिवार की मर्यादा का निर्वाह का मतलब होता हैं जीवन जीने की परम्परा और दोनों परिवार मे आपसी प्रेम को संतुलन मे रखना शादी के बाद जैसे कन्या पर वर के घर की जिम्मेदारी आती हैं वैसे लड़के पर भी उसके ससुराल की जिम्मेदारी आती हैं।
ये गहरी बातें हैं। मैने जैसे कहाँ था की शिव शक्ति से इन वचनो की शुरुआत हुई हैं। चंद्र देव का विवाह दक्ष प्रजापति की 27 नक्षत्र कन्याओं के साथ हुआ था। चंद्र का रोहिणी पर अधिक प्रेम देख। बाकि कन्याओं ने अपने पिता दक्ष को अपना दु:ख बताया।
दक्ष ने क्रोध में आकर चंद्र को श्राप दिया कि तुम क्षय रोग से ग्रस्त हो जाओगे। फिर धीरे धीरे चंद्र क्षय रोग से ग्रसित होने लगे और उनकी कलाएं क्षीण होना प्रारंभ हो गईं। नारदजी जी ने चंद्र को शिव जी की आराधना करने को कहा।
चंद्र अंतिम सांसें गिन रहे थे (चंद्र की अंतिम कला) कि भगवान शंकर ने प्रदोषकाल में चंद्र को पुनर्जीवन का वरदान देकर उसे अपने मस्तक पर धारण कर लिया। फिर धीरे-धीरे चंद्र स्वस्थ होने लगे और पूर्णमासी पर पूर्ण चंद्र के रूप में प्रकट हुए।
इसमें साफ जाहिर होता हैं। की शिव जी भी दक्ष के दामाद हैं तो उन्होंने अपने ससुराल की मर्यादा का सम्मान किया अगर चंद्र मृत्यु को प्राप्त हो जाते तो उनकी पत्नीयों के दुख मे शिव अर्धांगिनी सती माता को भी दुख होता और महादेव तो देवो के देव महादेव हैं भला शिव शक्ति को दुखी कैसे देख सकते हैं।
परिवार की मर्यादा और ईश्वर भक्ति के साथ धार्मिक अनुष्ठान जैसे पूजा आराधना, ध्यान, जाप तप, व्रत और हवन। ऐसा वचन अगर आप कन्या को देने और निभाने को त्यार हैं तो वो आपकी प्राणप्रिया होना स्वीकार करेगी।
प्रकृति ने सब कुछ सिर्फ स्त्री के हाथ मे दिया हुआ हैं।🤗
पर समय के साथ ज्ञान और ज्ञानी दोनों गुम होते जा रहे हैं।
अब कहाँ मिलते हैं ऐसे लड़के... जो बेशक शिव को ना जानते हो कम से कम शिव जैसा ज्ञान तो हो। गृहस्थी सुखी और खुशी से तभी चलती हैं।
ॐ नमः शिवाय🌌🌸
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