Friday, November 26, 2021

डार्क साइड ऑफ़ अथलेटिक्स ग्राउंड

एक जगह है पंचकुला में। जहाँ मैंने 6 साल बिताये सुबह - शाम बाकि दुनिया से दूर रहकर। शुरुआत अच्छी थी लेकिन अतं वैसा नहीं हुआ जो सोचकर मैंने शुरुआत की थी।
खैर कम से कम उस जगह ने मुझे ज्ञान तो दिया जिस से मै बाकि लोगों को ठीक कर सकता हूँ। किसी भी तरह से दिल, दीमाग या शरीर की चोट। 
पर मै यहां अपने बारे में बताने नहीं आया हूँ। उस जगह में आँखों से जितने लोगों के चेहरे पर हँसी दिखती है। उस से ज्यादा दुख, निराशा और हताशा झलकती है। हँसी बस ज्यादातर दिखावे की ही होती है।
मै शुरू में अनजान था की शायद इनके चेहरे जीवन में  कुछ ना मिलने या देर से सपने पुरे होने की है।
पर ऐसा मै लड़कों के बारे में बोल सकता हूँ।
वहा 2 सरकारी कर्मी है जो गुरू की भूमिका निभाते है उनके गुरुतत्त्व और सिखाने की कला में कोई कमी नहीं है।
मुझे  कोई शक नहीं है।
ना ही उनकी नज़रों में मैंने किसी के प्रति ऊंच नीच का भाव देखा 
लोग उनके बारे में कुछ भी कहे। इंसान अपनी कमियों को हमेशा दूसरे पर थोपता आया है।
भले ही उसे ईश्वर मिल जाये इंसान तो उसमे भी कमी निकाल देगा 😄 

हाँ तो उस जगह में सब ठीक था जब तक की उस जगह के North - East corner
से हवा में उड़ती हुई बातें नहीं आने लगी। शुरू में मैंने नज़रअंदाज़ किया की ऐसा कैसे हो सकता है।
धीरे - धीरे हर कोई जो भी मिलता ऐसी ही बातें मिलती सुनने को उस एक ही दुष्ट कुत्ते के बारे में की...
वो छोटी - छोटी लड़कियों को भी अपनी हवश की नज़र से देख लेता है।
गुरू के भेष में कुत्ता।
हालांकि मुझे यकीन नहीं होता था लेकिन सुनकर दुख होता था। फिर और बातें आने लगी लगातार मेरा मन हटता गया उस कुत्ते की भूमिका के प्रति।
कुछ साल बीत जाने के बाद।
जब मैंने खुद इन सब बातों की पड़ताल की तो मैंने लगभग सही पाया सब बातों को की सिर्फ हवश की नज़रों से देखता ही नहीं लड़कियों को हवश के जाल में फसाने की कोशिश भी होती है। 

मुझे बस एक आखरी कड़ी चाहिए थी। 

हाल ही के कुछ महीनो पहले उस हवश के कुत्ते ने मेरे ऊपर भी ऊँगली उठा दी। की मेरा चरित्र अच्छा नहीं जब मेरे एक मित्र ने मुझे ये बात बताई तो मेरी आत्मा को बोहोत ठेस पहुंची। 

पंचकुला की उस जगह के उस North - East corner में बैठने वाली एक बालिका मिली।
कॉलेज में बोली भईया मेरी मदद करो। वो दीमाग का संतुलन बिलकुल खो चुकी हैं।
उसकी उम्र की लड़किया या उस से छोटी बच्चिया संकोच करती है बात बताने में
उनके माँ बाप को शर्म आनी चाइये की वो अपने ही बच्चों क साथ रिश्ते नाते ऐसे नहीं बनाकर रख सकते की वो बाहर की दुनिया में हुई हर बात उन्हें आकर घर बताए और वो उन्हें बचाये सुरक्षा करे उनकी ऐसे कुत्तों से जिनकी आँखों और मुँह से हमेशा हवश टपकती रहती है।
और उन माँ बाप को डूब मरना चाइये जो ऐसे हवश के कुत्ते को बच्चे के नाम  पर जन्म देते है।
शर्म आणि चाइये उन्हें। 

हाँ तो पिछले 3 सालों में मै 6 - 7 बार उसे समझा चूका हूँ।
मुझे बड़ा दुख होता है जब उसने बताया की कुत्ते की हड्डी सीधी नहीं हो रही 
कॉलेज में वो क्या करती है किस से उसकी दोस्ती है किस के साथ उठती बैठती है सब बातें
पंचकुला की उस जगह में पहुंचाई जा रही है। जहाँ उस घटिया कुत्ते का डेरा है।


मैंने उस बालिका से कहा भी की अगर जिंदगी बनानी है तो उस
जगह को छोड़ दो लेकिन उसके घर वाले नहीं मानते। मैंने कहा की बस नज़रअंदाज़ कर और कामयाब होकर जल्दी से निकल जा यहां से।
मै और किस तरिके से मदद करूं उसकी... दुख होता है 😔
हमारे देश की कानून प्रणाली भी ऐसी नहीं है की ठीक से हो जाये कुछ।
वो बालिका बोली की आप सरकारी कर्मियों से बात करलो
भगा दो उस दुष्ट को वहा से। लेकिन मै कैसे समझाऊ उसे की ये नामुमकिन है।
उस बालिका के पास सबूत भी है पर अपने लिए भी और सही के साथ खड़े होने के लिए भी अपने ही परिवार वालों से बात करने के लिए भी हिम्मत नहीं है उसमे। 

तो मै तो बस अपनी कलम चला सकता हूँ। क्यू की धर्म और सच ना किसी को डरने देता है ना ही हारने देता है।
कुदरत की अदालत में नियम नहीं कर्म चलते है और वो दुष्ट कुत्ता भुगत भी रहा है।
भले ही धीरे - धीरे लेकिन मुझे पक्का यकीन है वो कुत्ता आसान मौत तो बिलकुल नहीं मरने वाला अगर उसने ऐसा सच में किया है।
जो सब लोग उसके बारे में बोलते है
और मै काफ़ी बालिकाओं से 2017 से सुनता आ रहा हूँ की वो कितना घटिया कुत्ता है।
हालांकि उन बालिकाओं ने मुझे कारण नहीं बताया पर मै समझ सकता हूँ की क्या वजह है। वो तो चलो निकल गयी उस कोने से।
सवाल ये है की...
आने वाली बाकि 
बाकि भोली भाली लड़कियों का क्या...?




No comments:

Post a Comment