Saturday, October 30, 2021

Onion 4

दोस्ती इम्तेहान लेती है” पता नहीं किस गधे ने कहा है ये। जब आप मतलब की मित्रता करते है। तब इम्तेहान अपने आप हो जाता है। हालात ही ऐसे पैदा हो जाते है।
जब सामने वाला उम्मीदों पर खरा ना उतरे। जब आपसे किये हुए वादे वो अपनी किसी मजबूरी में पुरे ना कर सके या जब दोस्ती प्यार में बदल कर बिना रीती-रिवाज़ की शादी और बिना साथ जीवन जीने के कस्मो-वादों के बिना। बिना रस्मो-रीवाज के ईश्वर की मौजूदगी के बिना बड़ो के आशीर्वाद के बिना।
बिस्तर पर जाकर दम तोड़ दे।

बशर्ते दोस्ती इम्तेहान लेगी ही और बिच रास्ते में दम तोड़ देगी। फिर धरे के धरे रह जाते है दोस्ती में किये वादे।

अब वो समय भी नहीं है की श्री कृष्णा और सुदामा जैसे। श्री राम और सुग्रीव जैसे
राधा- कृष्णा जी। द्रोपदी और श्री कृष्णा जी जैसे श्री कृष्ण जी ने द्रौपदी के हर संकट में साथ देकर अपनी मित्रता का कर्तव्य निभाया । और ऐसे ही पता नहीं कितने ही उदाहरण भरे पड़े है और प्रेम और मित्रता कर्तव्य और निष्ठा के।

सच्ची और बिना मतलब की मित्रता में इम्तेहान नहीं प्रेम होता है। निष्ठा होती है एक दूसरे के प्रति एक आपसी समझ और अटूट रिश्ता होता है।
एक अपना पन होता है। सच्ची मित्रता समाज की सोच की सीमाओं से परे होती है।
वो कभी भटकती नहीं। जीवन भर साथ रहती है।

उसमे सड़ी हुई लाश जैसी उमीदें नहीं होती। होता है तो एक प्रेम जो बिना कहे सिर्फ आँखों से ही सब कह दे। जो एक कपड़े की छोटी से कतरन का ऋण एक अनंत साड़ी से चूका दे। (महाभारत- श्री कृष्ण ऋण अर्पण) मै यहां उसे वस्त्र हरण नहीं लिखूंगा।
उसका कोई क्या बिगाड़ सकता है जिसकी रक्षा खुद प्रभु करते हो। और हज़ारों साल पहले की घटना को आप समझ भी नहीं सकते। TV में देख कर अंदाजा लगाना मूर्खता है।
वो नियति थी द्रोपदी देवी जी की और दुर्योधन की। पांडव उसमे कुछ नहीं कर सके वो उनकी नियति थी। उन बातों के कारण को जानने के लिए तपस्या करनी पड़ती है। उसके लिए अब ना समय है ना आपका कर्म और ना ही श्री कृष्णा जी जैसा पथ प्रदर्शक।

हाँ तो।

मित्रता किन्ही दो पहले से बने हुए रिश्तों में भी हो सकती है
पति-पत्नी, भाई-बहन, बाप-बेटे में। मित्रता किसी भी रिश्ते को और गहराई से समझने और एक दूसरे को आपस में किसी रिश्ते में जुड़ने और समझने के लिए वक़्त देती है।
और हर किसी को इस वक़्त की समझ और कदर होनी चाइये। किसी रिश्ते में आने से पहले या एक दूसरे से जिंदगी भर साथ रहने का वादा करने से पहले।
एक दूसरे को छूने से पहले। खुद की आत्मा को एक बार टटोल लेना चाइये।
कहीं आपकी मौजूदगी सामने वाले की जिंदगी में उसकी खुशियाँ उथल पुथल ना कर दे।
जाहिर सी बात है इसमें आप ही की गलती होगी। बिना समझ के रिश्तों की नींव खोखली होती है। जिंदगी भर के लिए खुशियों में जहर घुल जाता है आपकी की हुई एक गलती किसी को जिंदगी भर के लिए ज़िंदा लाश बना सकती है फिर हँसी उसके चेहरे का एक मुखौटा बनके रह जाती है

फिर उसकी जिंदगी में सच में कोई उसे प्रेम करे या कितना भी उसे चाहे कितनी भी शिदत्त से उसका टूटा दिल जोड़ना चाहे।

आपकी बेवकूफी और मूर्खता की दी हुई तकलीफे

किसी सच में उसके लायक इंसान से भी उसे रिश्ता जोड़ने से पीछे खींचेगी। 
🙏

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