Saturday, October 30, 2021

Onion 3 - Planets


किसी की भी ग्रह दशा को ठीक करना या उसका प्रभाव खतम करना मुझे आता है।
पर इतनी मात्रा में ऊर्जा को इकठा करना और उसे दिशा देना थोड़ा मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं। खैर ग्रह दशा से तो देवता नहीं बच सके। ग्रहों का काम है कर्म फल देना। कर्म का ज्ञान मुझे है।
पर जब किसी को आप पसंद करे और कुंडली मिलाने पर
कार्य – प्रभुत्व – भाग्य – मानसिकता – अनुकूलता – गुण स्तर और स्वास्थ्य सब ठीक हो सब मिल रहे हो लेकिन बस प्रेम का गुण ही ना हो प्रेम ही ना मिल रहा हो।
प्रेम के बिना सांसारिक जीवन और भक्ति मार्ग दोनों ही कठिन है।

भगति मार्ग पर आप जैसे तैसे चल लोगे लेकिन सांसारिक जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती प्रेम के बिना । जीवन में अर्धांगिनी ना होने से आप अधूरे ही रहेंगे और अधूरे होने से भक्ति मार्ग पर हुई गलतियों के दोष का भागी भी बनना पड़ेगा।
इसमें उच्च कोटि की दैवीय शक्तियों की कृपया प्राप्त करने से सब ग्रहों का और कुंडली का कोई मूल्य नहीं रह जाता फिर दैवीय शक्तियां ग्रहो को अपनी आज्ञा से चलाती है। ग्रह खुद पीछे हट जाते है। लेकिन अर्धांगिनी के बिना कर्म करने से आपको आधा ही फल मिलेगा।
अब मुझे पता है की कृपया प्राप्त हो जाएगी लेकिन इसमें ये भी तो है की सामने वाला मनुष्य आपका होना ही ना चाहता हो। पर मुझे तो सब तरह की जानकारी है सांसारिक जीवन की। और मुझे तो स्त्री प्रकृति की शक्ति का रहस्य भी पता है।

ये सब तो माँ जगदम्बे जाने पर जब जीवन में प्रेम नहीं होता तब महसूस होता है।

क्या बीती होगी श्री राम जी पर जब सीता मैया का वियोग मिला उन्हें और कृष्णा जी पर राधा से दूर जाते वक़्त क्या बीती होगी।

वो तो अवतरित पुरुषोत्तम है उनका तो काम था प्रकृति में मिलकर कार्य करना।
मै तो मनुष्य हूँ। मेरे कर्म पर तो मेरा ही अधिकार है।
सोचता हूँ बस सब होते हुए देखता रहूँ। पता भी सब है की क्या होगा।
आत्म शक्ति कहती है कृष्ण बन जा और मनुष्य कामनाओ की शक्ति कहती है संसार में मिल जा।
ऐसी खाई के किनारे खड़ा हूँ
निचे कूद जाऊ तो अध्यात्म पकड़ लेगा
और पीछे मनुष्य मन की सांसारिक कामनायें हाथ खींच रही है।

Amit.

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