अध्यात्म में छिपाने जैसा कुछ नहीं होता।
नाथ जी के पास पिछली गर्मियों में बैठे हुए मनुष्य जीवन के बारे में वार्ता हो रही थी तो मै ज्यादातर अध्यात्म के विषय में ही प्रश्न करता हूँ।
उनसे जब वार्ता हो रही थी की मनुष्य जन्म और ये शरीर कितना मूल्यवान हैं की करोड़ो साल भी कम हैं इसे समझने के लिए।
तो अब मनुष्य जाती ये सब क्यों नहीं जान पाती। इतनी मूल्यवान जानकारी
हैरत कर देने वाली साधुओं की बाते।
तब मैंने पूछा की अब लोग क्यों पहले की तरह अद्यात्मिक मार्ग पर नहीं बढ़ रहे हैं।
उन्होंने कहा की कलयुग का प्रभाव बढ़ जाने के कारण ऐसा हो रहा हैं।
कुछ तो खुद ही लोग मन चूराने लगे हैं। बाकि अद्यात्मिक मार्ग पर कोई विरला ही चल पाता हैं। क्यों की कलयुग नहीं चाहता की कोई प्रकृति के नियम को तोड़कर मोक्ष को प्राप्त कर जीवन मरण के बंधन से छूट जाये।
अगर सब लोग ही मोक्ष के मार्ग पर चल पड़े तो धरती पे कोई रहेगा ही नहीं।
प्रकृति का संतुलन ही नहीं होगा तो फिर कलयुग किस बात का।
अब लोग मंदिरों या साधु सन्यासियों के पास बस अपने दुख दर्द लालच घर गृहस्थी की बातें पूछने जाते हैं या फिर लॉटरी सट्टा के नंबर।
मुक्ति मोक्ष की बातें करने नहीं जाता कोई भी।
ज्ञान की बातें बस मनोरंजन के लिए ही सुनते हैं।
धर्म के मार्ग पर बढ़ने के लिए नहीं।
और अब कोई ज्ञान की बातें बताता भी या किसी समस्या का समाधान करता हैं उसमे भी समाज की भलाई के साथ साथ कही ना कही कोई स्वार्थ छिपा होता है। जनकल्याण को भूलते जा रहे है।
मुझे जब इन सब की जानकारी हुई तो मैंने पाया की कितनी दुर्लभ जानकारी हैं
जो इंसान को मोक्ष तक दिला सकती हैं।
पर मोक्ष पाना सब चाहते हैं इसके मार्ग पर चलना कोई नहीं चाहता।
बड़े दुर्भाग्या की बात है।
अगर गंगा जी स्नान करने से और भगवन नाम का कुछ लक्ष जाप कर लेने मात्र से अगर मोक्ष मिल जाता तो इतनी तादात में आबादी पैदा नहीं होती
खैर ये काफ़ी सूक्ष्म गहराई की बातें हैं।
अब लोग अध्यात्म को किसी दूसरी नज़र से देखते हैं
कुछ हैं जो यकीन करते हैं और कुछ हैं जो बिलकुल भी यकीन नहीं करते।
अब अध्यात्म का मतलब ये ही जानते हैं लोग की वशीकरण कैसे करे किसी का किसी को प्रेम के जाल मे कैसे फसाए। तरह तरह के काम।
इन सब बातों का अध्यात्म से कोई लेना देना हैं भी नहीं।
बस भेड़ चाल में चले जा रहे हैं।
शुक्रिया 🙏
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